दयारा बुग्याल में खेली गई दूध, दही और मक्खन की होली, अंढूड़ी बटर फेस्टिवल में उमड़ा जनसैलाब

दयारा बुग्याल में दूध-दही और मक्खन की होली, रासौ-तांदी नृत्य ने बांधा समां

दयारा बुग्याल में खेली गई दूध, दही और मक्खन की होली

उत्तरकाशी। उत्तरकाशी स्थित प्रसिद्ध दयारा बुग्याल में सोमवार को पारंपरिक अंढूड़ी (बटर फेस्टिवल) उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। समेश्वर देवता की डोली की मौजूदगी में आयोजित इस अनूठे पर्व में ग्रामीणों ने दूध, दही और मक्खन से होली खेलकर उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की झलक पेश की।

इस दौरान पारंपरिक रासौ-तांदी नृत्य की रंगारंग प्रस्तुतियों ने दयारा बुग्याल के वातावरण को भक्तिमय और उत्सवमय बना दिया।

समेश्वर देवता की डोली के साथ पहुंचे ग्रामीण

दयारा पर्यटन विकास समिति की ओर से पंचगाई पट्टी के रैथल सहित नटीण, बंद्राणी, क्यार्क और भटवाड़ी गांवों के ग्रामीण अपने आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के साथ दयारा बुग्याल पहुंचे। इसके अलावा उत्तरकाशी जिले के अन्य क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु इस पारंपरिक उत्सव में शामिल हुए।

पांच पांडवों के पश्वाओं के अवतरित होने से हुई शुरुआत

अंढूड़ी पर्व की शुरुआत पांच पांडवों के पश्वाओं के अवतरित होने के साथ हुई। इसके बाद समेश्वर देवता की देवडोली के साथ उनके पश्वा भी अवतरित हुए।

लोक परंपरा के अनुसार समेश्वर देवता ने कफुवा पर डांगरियों के बीच चलकर मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं और मेलार्थियों को आशीर्वाद दिया।

देवी-देवताओं को लगाया गया दूध, दही और मक्खन का भोग

पर्व के दौरान दयारा बुग्याल में बनी छानियों में ग्रामीणों की ओर से एकत्र किए गए दूध, दही और मक्खन को वन देवताओं तथा स्थानीय देवी-देवताओं को भोग लगाया गया।

धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद राधा-कृष्ण की जोड़ी ने मक्खन से भरी हांडी फोड़ी।

हांडी फूटते ही शुरू हुई अनोखी होली

मक्खन से भरी हांडी फूटते ही पूरा बुग्याल उत्सव के रंग में रंग गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे पर दूध, दही और मक्खन लगाकर अनूठी होली खेली।

इस दौरान लोगों ने जमकर उत्सव का आनंद लिया और पारंपरिक लोकगीतों एवं नृत्य के साथ खुशी मनाई।

रासौ-तांदी नृत्य ने बांधा समां

अंढूड़ी पर्व के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक लोक वेशभूषा में राधा-कृष्ण की जोड़ी के साथ रासौ-तांदी नृत्य प्रस्तुत किया। पुरुषों ने भी नृत्य में बढ़-चढ़कर भाग लिया।

दयारा बुग्याल की हरी-भरी वादियों के बीच आयोजित इस पारंपरिक उत्सव ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति, आस्था और ग्रामीण परंपराओं को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

8. क्यों खास है अंढूड़ी पर्व?

अंढूड़ी यानी बटर फेस्टिवल उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल में मनाया जाने वाला विशिष्ट पारंपरिक पर्व है। इस उत्सव में दूध, दही और मक्खन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ लोक नृत्य और सामूहिक उत्सव इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं।