रुद्रप्रयाग में पशुपालन योजनाओं से स्वरोजगार को बढ़ावा, महिलाओं को मिल रहा लाभ

पशुपालन योजनाओं से स्वरोजगार की राह आसान, महिलाओं और पशुपालकों को मिल रहा लाभ

रुद्रप्रयाग। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के मार्गदर्शन में पशुपालन विभाग द्वारा जिले में विभिन्न योजनाएं संचालित कर महिलाओं, पशुपालकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। इन योजनाओं के जरिए ग्रामीणों की आय बढ़ाने और आजीविका मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

महिलाओं को बकरी पालन से जोड़ने की पहल

मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी आशीष रावत ने बताया कि महिला बकरी पालन योजना के तहत गरीब, निराश्रित, विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को ₹35 हजार की लागत वाली यूनिट दी जाती है। इसमें तीन बकरियां और एक बकरा शामिल है। गत वित्तीय वर्ष में 20 महिलाओं को इसका लाभ मिला।

वहीं, राज्य सेक्टर बकरी पालन योजना के तहत 84 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया। योजना में 10 बकरियां और एक बकरा दिया जाता है। इसके साथ कोऑपरेटिव के माध्यम से ₹30 हजार का ऋण भी उपलब्ध कराया जाता है।

एससी लाभार्थियों के लिए विशेष योजनाएं

राज्य सेक्टर बकरी पालन योजना एसईपी के तहत अनुसूचित जाति के 31 लाभार्थियों को लाभ दिया गया। इसके अलावा अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए गो पालन योजना के तहत 21 महिलाओं को लाभ मिला।

भेड़ पालन योजना के तहत अनुसूचित जाति के 25 लाभार्थियों को 10 भेड़ और एक भेड़ा उपलब्ध कराया गया।

गो पालन और बॉयलर पालन से रोजगार

सामान्य वर्ग के लाभार्थियों के लिए भी गो पालन योजना संचालित है। इसके तहत एक गाय की यूनिट स्थापित करने के लिए ₹40 हजार की सहायता दी जाती है, जिसमें 90 प्रतिशत राज्यांश और 10 प्रतिशत लाभार्थी का अंश होता है।

इसके अलावा बॉयलर पालन योजना के तहत बाड़ा तैयार करने में सहायता, बॉयलर चूजे और ₹60 हजार का अनुदान दिया जाता है। गत वित्तीय वर्ष में 25 लाभार्थियों को इसका लाभ मिला।

पांच नंदियों के पालन पर ₹12 हजार प्रतिमाह

ग्राम्य गो सेवक योजना के तहत आवारा नंदियों के संरक्षण और पालन-पोषण के साथ ग्रामीणों को रोजगार भी दिया जा रहा है। योजना में लाभार्थी पांच आवारा नंदियों का पालन करते हैं और इसके बदले उन्हें ₹12 हजार प्रतिमाह दिए जाते हैं।

पशुपालन विभाग की इन योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं, पशुपालकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं। इससे ग्रामीण आय बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल रहा है।