एमडीडीए का मियांवाला में पर्यावरणीय तोहफा, 8.63 करोड़ से विकसित हुआ जल-सृष्टि पार्क
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने मियांवाला स्थित वर्षों पुराने जौहड़ और जलस्रोत का कायाकल्प कर इसे आधुनिक जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया है। करीब 8.63 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना में जल संरक्षण के साथ आमजन के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।
सिटी फॉरेस्ट के बाद एमडीडीए की इस पहल को देहरादून में प्राकृतिक जलस्रोतों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पुराने जौहड़ को मिला नया जीवन
मियांवाला के पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप स्थित जौहड़ और पुराने तालाब क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षित था। एमडीडीए ने इस क्षेत्र का सौंदर्यीकरण करते हुए इसे हरित क्षेत्र और जनसुविधाओं से जोड़कर आकर्षक पार्क का स्वरूप दिया है।
परियोजना में जलस्रोत के संरक्षण के साथ जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। पार्क में नौकायन जैसी गतिविधियों के लिए भी व्यवस्था की गई है।
पार्क में योग डेक से लेकर वॉकिंग ट्रैक तक सुविधाएं
जल-सृष्टि पार्क को आधुनिक सुविधाओं के साथ उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी शैली से भी जोड़ा गया है। पार्क में पारंपरिक पहाड़ी शैली का मुख्य प्रवेश द्वार, योग डेक, योग से संबंधित मूर्तिकला, गजीबो, वॉकिंग ट्रैक और गार्डन बेंच विकसित किए गए हैं।
इसके अलावा पार्क में कैंटीन, स्वच्छ शौचालय और तालाब के आसपास सुरक्षा रेलिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
तालाब में जलीय फूल और मछलियों के साथ पार्क में पक्षियों एवं हरियाली का भी विशेष ध्यान रखा गया है। इससे यह स्थान परिवारों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
एमडीडीए उपाध्यक्ष ने किया पार्क का निरीक्षण
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने जल-सृष्टि पार्क का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पार्क परिसर में रुद्राक्ष का पौधा भी रोपा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में एमडीडीए ऐसी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें विकास के साथ प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित हो।
बंशीधर तिवारी के मुताबिक, मियांवाला के पुराने तालाब और जौहड़ क्षेत्र को विकसित करने का उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि जलस्रोत का संरक्षण और आमजन को बेहतर सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराना भी है।
सिटी फॉरेस्ट के बाद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और पहल
एमडीडीए के अनुसार, जल-सृष्टि पार्क देहरादून में हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की सोच को आगे बढ़ाने वाली परियोजना है।
जौहड़ और पुराने जलस्रोत के पुनर्जीवन से क्षेत्र की सुंदरता बढ़ने के साथ जल संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पुराने तालाबों, जौहड़ों और प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मियांवाला की यह परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
एमडीडीए का कहना है कि भविष्य में भी शहर के प्राकृतिक संसाधनों और हरित क्षेत्रों को संरक्षित करते हुए जनहित से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
पुराने जलस्रोतों को बचाना प्राथमिकता: बंशीधर तिवारी
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून के विकास में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि मियांवाला के पुराने तालाब और जौहड़ क्षेत्र को 8.63 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं के साथ जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया गया है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी प्राकृतिक जलस्रोतों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण का प्रयास जारी रहेगा।
विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण जरूरी: मोहन सिंह बर्निया
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि मियांवाला जल-सृष्टि पार्क विकास और पर्यावरण संरक्षण का बेहतर उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि पार्क में हरियाली, योग, वॉकिंग और नौकायन जैसी सुविधाएं लोगों को प्रकृति से जोड़ने में मदद करेंगी। एमडीडीए भविष्य में भी प्राकृतिक संसाधनों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण को प्राथमिकता देगा।

More Stories
तिलवाड़ा-मयाली-गुप्तकाशी मोटर मार्ग को दो लेन में विकसित करने की मांग, सतपाल महाराज ने नितिन गडकरी के सामने रखे कई सुझाव
हरिद्वार में विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई: 10 हजार और 35 हजार रुपये रिश्वत लेते दो अधिकारी गिरफ्तार
दयारा बुग्याल में खेली गई दूध, दही और मक्खन की होली, अंढूड़ी बटर फेस्टिवल में उमड़ा जनसैलाब