अल्मोड़ा। भैंसियाछाना ब्लॉक के छानी गांव में पिछले तीन सप्ताह से ग्रामीणों के लिए दहशत का पर्याय बनी मादा गुलदार आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गई। गुलदार के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उसका रेस्क्यू कर एनटीडी स्थित रेस्क्यू सेंटर भेज दिया। मादा गुलदार के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
ग्रामीण पर किया था हमला
बीते माह 19 तारीख को घर से दुकान की ओर जा रहे एक ग्रामीण पर मादा गुलदार ने अचानक हमला कर दिया था। हमले में ग्रामीण घायल हो गया था। इससे एक दिन पहले भी गुलदार ने एक अन्य ग्रामीण पर हमला किया था। लगातार दो दिनों तक हुए हमलों के बाद गांव में भय का माहौल बन गया था।
सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों की मदद से घायल व्यक्ति को उपचार के लिए अल्मोड़ा जिला अस्पताल पहुंचाया था।
वन विभाग ने लगाए थे पिंजरे और ट्रैप कैमरे
ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने के लिए गांव में पिंजरा लगाया था। इसके साथ ही अलग-अलग स्थानों पर ट्रैप कैमरे भी लगाए गए थे। वन विभाग की टीम लगातार गुलदार की गतिविधियों पर नजर रख रही थी।
करीब एक सप्ताह बाद पिंजरे में गुलदार का एक शावक कैद हुआ। टीम ने शावक का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया। हालांकि, मादा गुलदार के नहीं पकड़े जाने से ग्रामीणों की चिंता बनी हुई थी।
दहाड़ से घरों से बाहर निकलने में डर रहे थे ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार, रात के समय गुलदार की दहाड़ सुनाई देने से लोग घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे थे। खेतों और रास्तों पर आवाजाही के दौरान भी ग्रामीणों को अनहोनी की आशंका बनी रहती थी। ग्रामीण लंबे समय से मादा गुलदार को पकड़ने की मांग कर रहे थे।
आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में मादा गुलदार के कैद होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।
मेडिकल जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
हवालबाग के रेंजर मोहन राम आर्या ने बताया कि सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और गुलदार का रेस्क्यू किया। इसके बाद उसे एनटीडी स्थित रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है।
उन्होंने बताया कि रेस्क्यू सेंटर में गुलदार का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद उच्च अधिकारियों के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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